ये है रहस्य #विजय का.... जानिये जीवन को बदल देने वाला प्रसगं..


ये है रहस्य #विजय का___________
भयंकर #समुद्र लहरा रहा था.. उसकी लहरें मानो चीख चीख कर कह रही हों ...कि विजय से पहले तुम्हे हम पर #महाविजय प्राप्त करनी होगी.....

यदि वास्तव मे तुममें साहस है..‌.यदि सच मे #लक्ष्य पाना चाहते हो तो आओ और #मुझसे जीतकर विजय श्री का वरण करो...

कुछ सेना निराश सी हो रही थी कि क्या वास्तव मे हम ये विशाल सागर पार कर #लंका पहुँच भी पायेंगे या नहीं??
लेकिन.. एक श्री #राम
जिनकी मर्यादा के सन्मुख महासमुद्र घबराता था..
जिनके धनुष की टंकार मात्र से हिमालय कंप जाता था

उन #श्रीराम को देखकर एक आशा थी मन मे, कि हम सागर भी पार करेंगे ..और युद्ध भी जीतेंगे..

#रामायण कालीन दो कुशल #इंजीनियर #नल और #नील की मदद से और समस्त सैनिकों के पुरुषार्थ से आखिर महासागर भी पार हुआ और युद्ध मे विजय भी प्राप्त हुई...

आज #जब हमारे समक्ष कोई ऐसी परिस्थिति आती है तो हम घबराकर , निराश होकर बैठ जाते हैं...क्या करें.. अपने हाथ में नहीं है.. अनुकूल #वातावरण नहीं है..सत्ता का सहयोग नहीं मिलता..
हमें निराश होने की जगह अपने लक्ष्य को केन्द्र मे रखना चाहिये..‌जैसे #अर्जुन ने किया था... 

फिर हमें दुनिया की कोई #ताकत नहीं रोक सकती लक्ष्य प्राप्त करने मे.‌‌.‌.

 "उद्यमेन ही सिद्ध्यन्ति कार्याणि, न मनोरथै:" |

सारे काम उद्यम अर्थात-पुरुषार्थ से ही सिद्ध होते हैं ‌‌‌...ना कि केवल बड़े- बड़े #सपने देखने से..

और जब आप दृढ संकल्प के साथ परिश्रम करते है तो पूरी समष्टि आपकी सहायक बन जाती है‌‌‌‌...सभी #सात्विक शक्तियाँ आपके साथ खडी हो जाती हैं.. ‌क्योंकि यह संसार #विजेताओं के झंडे को ही वंदन करता है ..

 "उद्यम साहस धैर्य बुद्धि: शक्ति: पराक्रम: |
  षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देवा: सहायका: "||

#गिलहरी , चींटी से लेकर प्रत्येक जीव जन्तु कर्मशील है, परिश्रम करते हैं ‌‌...और उन्हें जो चाहिये होता है.. उसे प्राप्त करते हैं...

इसलिये तुम भी जागो और भारत को #भारतवर्ष पुनः #आर्यावर्त्त .. बनाने के लिये तैयार हो जाओ...
सफलता तो निश्चित रूप से राह देख रही है..

#उपनिषदों ने कहा है...

" उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्यवरान्निबोधत "

गीता मे #योगेश्वर श्रीकृष्ण ने भी यही कहा..
 "क्षुद्रं हृदय दौर्बल्यं त्यक्त उत्तिष्ठ परंतप "

#वेदों ने कहा है...

  "यो जागार: तमृच: कामयन्ते "

#महाभारत मे वेदव्यास कहते हैं ‌..

  "मैं दोनों हाथ उठाकर चिल्ला चिल्ला कर कहता हूँ ‌.‌.‌‌.धर्म, अर्थ, काम , मोक्ष इन सबका आधार #पुरुषार्थ है‌."

पूरी दुनिया जीत सकते हो यदि मन मे एक #लक्ष्य और उसके लिये तुम्हारा पुरूषार्थ हो‌... और यह अतिशयोक्ति नहीं ..सम्पूर्ण भूमण्डल को एक बार नहीं.. बार बार जीता है हमारे #चक्रवर्ती सम्राटों ने.. यह इतिहास है हमारा

यदि तुम पुरूषार्थ नहीं करोगे तो #आसुरी शक्तियां तो लगी ही हैं मेहनत करने मे

  वो विजय प्राप्त करें उससे पहले तुम जाग जाओ..
और लग जाओ पुरूषार्थ मे...तुम #विजय प्राप्त कर लो...











 



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