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आर्यवृत के वासी हैं हम..अब अपना नववर्ष मनाएंगे....पढ़े विचारणीय पंक्तियों का लघु संकलन...

*हवा लगी पश्चिम की*
*सारे कुप्पा बनकर फूल गए ।*

*ईस्वी सन तो याद रहा ,*
*पर अपना संवत्सर भूल गए ।।*

*चारों तरफ नए साल का ,*
*ऐसा  मचा है हो-हल्ला ।*




     *बेगानी शादी में नाचे ,*
 *जैसे कोई दीवाना अब्दुल्ला ।।*

*धरती ठिठुर रही सर्दी से ,*
*घना कुहासा छाया है ।*


कैसा ये नववर्ष है ,*
*जिससे सूरज भी शरमाया है ।।*

*सूनी है पेड़ों की डालें ,*
*फूल नहीं हैं उपवन में ।*

*पर्वत ढके बर्फ से सारे ,*
*रंग कहां है जीवन में ।।*

*बाट जोह रही सारी प्रकृति ,*
*आतुरता से फागुन का ।*

*जैसे रस्ता देख रही हो ,*
*सजनी अपने साजन का ।।*


अभी ना उल्लासित हो इतने ,*
*आई अभी बहार नहीं ।*

*हम अपना नववर्ष मनाएंगे ,*
*न्यू ईयर हमें स्वीकार नहीं ।।*

*लिए बहारें आँचल में ,*
*जब चैत्र प्रतिपदा आएगी ।*

*फूलों का श्रृंगार करके ,*
*धरती दुल्हन बन जाएगी ।।*

*मौसम बड़ा सुहाना होगा ,*
*दिल सबके खिल जाएँगे ।*

*झूमेंगी फसलें खेतों में ,*
*हम गीत खुशी के गाएँगे ।।*

*उठो खुद को पहचानो ,*
*यूँ कब तक सोते रहोगे तुम ।*

*चिन्ह गुलामी के कंधों पर ,*
*कब तक ढोते रहोगे तुम ।।*

*अपनी समृद्ध परंपराओं का ,*
*आओ मिलकर मान बढ़ाएंगे ।*

*आर्यवृत के वासी हैं हम ,*
*अब अपना नववर्ष मनाएंगे ।।*

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