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स्व परिवर्तन से ही विश्व परिवर्तन.....पढ़े क्या है रहस्य


*कबूतर के एक जोड़े ने अपने लिए घोंसला बनाया । परंतु जब कबूतर जोड़ें उस घोंसले में रहते हैं तो अजीब बदबू आती रहती थी  । उन्होंने उस घोंसले को छोड़ कर दूसरी जगह एक नया घोसला बनाया, मगर स्थिति वैसी थी । बदबू ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा ।*

*परेशान होकर उन्होंने वह मोहल्ला ही छोड़ दिया और नए

मोहल्ले में घोसला बनाया । घोंसले के लिए साफ सुथरे तिनके जोड़ें, मगर यह क्या ! इस घोंसले में भी वहीं, उसी तरह की बदबू आती रहती थी ।*



थक हार कर उन्होंने अपने एक बुजुर्ग चतुर कबूतर से सलाह लेने की ठानी और उनके पास जाकर तमाम वाकया बताया ।*

*चतुर कबूतर उनके घोंसले में गया, आसपास घुमा फिरा और फिर बोला, घोसला बदलने से यह बदबू नहीं जाएगी । बदबू घोंसले में नहीं, तुम्हारे अपने शरीर से आ रही है । खुले में तुम्हें अपनी बदबू महसूस नहीं होती, मगर घोंसले में घुसते ही तुम्हें यह महसूस होती है और तुम समझते हो कि बदबू घोंसले से आ रही है । अब जरा अपने आप को साफ करो ।*


पूरी दुनिया से खामियां निकालने और बदबू ढूंढने के बजाय हम अपने भीतर की खामियों (कमजोरियों )और अपवित्रता रूपी ( विकारों) बदबू को हटाएं तो दुनिया सचमुच खूबसूरत और खुशबूदार हो जाएगी ।  

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राजा दिलीप की कथा... “रघुवंशम” एक विचित्र सार.....पढ़े क्या है रहस्य

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