विदेश से मैं आयी हूँ,दूध मुझसे सस्ता है,.. Best poems

पेप्सी बोली सुन कोका कोला !
भारत का इन्सान है बहुत भोला।

विदेश से मैं आयी हूँ,
साथ में मौत को लायी हूँ ।



लहर नहीं ज़हर हूँ मैं,
गुर्दों पर गिरता कहर हूँ मैं ।

मेरी पी.एच. दो पॉइन्ट सात,
मुझ में गिरकर गल जायें दाँत ।

जिंक आर्सेनीक लेड हूँ मैं,
काटे आतों को, वो ब्लेड हूँ मैं ।

हाँ दूध मुझसे सस्ता है,
फिर पीकर मुझको क्यों मरना है ।

540 करोड़ कमाती हूँ,
विदेश में ले जाती हूँ ।

मैं पहुँची हूँ आज वहाँ पर,
पीने को नहीं पानी जहाँ पर ।

छोड़ो नकल अब अकल से जीयो,
और जो कुछ पीना संभल के ही पीयो ।

बच्चों को यह कविता सुनाओ,
नीबूपानी पिओ सौ साल जिओ ॥

Theme images by LUGO. Powered by Blogger.